हम बच्चे अब बड़े हो गए है
मासूम हम न रह सके ।
कुछ तो जिमेदारियों का बोझ है
और कुछ नाकामियों का दर्द हम न सह सके ।।
पहले कुछ कंचों में मन भर जाता था
आज तो हीरे भी कम पड़ते है ।
औकाद नहीं हमारी कुछ भी
पर अरमानो का झुण्ड गढ़ते है ।।
पहले गुस्सा होते थे तो मनाना भी आसान था
अब गुस्सा आता है तो अपना भी अनजान है ।
शायद ज़बान में कुछ ताक़त आ गयी है ऐसी
पहले जो जान थी आज वोही बेजान है ।।
-CRK-
मासूम हम न रह सके ।
कुछ तो जिमेदारियों का बोझ है
और कुछ नाकामियों का दर्द हम न सह सके ।।
पहले कुछ कंचों में मन भर जाता था
आज तो हीरे भी कम पड़ते है ।
औकाद नहीं हमारी कुछ भी
पर अरमानो का झुण्ड गढ़ते है ।।
पहले गुस्सा होते थे तो मनाना भी आसान था
अब गुस्सा आता है तो अपना भी अनजान है ।
शायद ज़बान में कुछ ताक़त आ गयी है ऐसी
पहले जो जान थी आज वोही बेजान है ।।
-CRK-

